तो ऐसे हुई दिवाली बोनस की शुरुआत! जानिए कैसे शुरू हुई ये परंपरा और क्यों आज भी जारी है

On: October 11, 2025

 

दिवाली सिर्फ दीयों और मिठाइयों का त्योहार नहीं, बल्कि खुशियों और इनामों का भी समय होता है। हर साल कर्मचारियों को इस मौके पर मिलने वाला ‘दिवाली बोनस’ उनके चेहरों पर मुस्कान ले आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये परंपरा आखिर शुरू कब और कैसे हुई? आइए जानते हैं दिवाली बोनस की दिलचस्प कहानी।

ब्रिटिश काल से शुरू हुई थी परंपरा

दिवाली बोनस की शुरुआत भारत में करीब 1940 के दशक में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। उस समय टेक्सटाइल मिलों और फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारियों को त्योहारी सीजन में थोड़ा अतिरिक्त पैसा देने की प्रथा शुरू हुई। इसका मकसद था — त्योहारों के खर्च को संभालने में मदद और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाना।

मजदूरों के संघर्ष के बाद मिला अधिकार

कहा जाता है कि दक्षिण भारत के एक क्षेत्र में कामगारों ने दिवाली पर वेतन के साथ अतिरिक्त भुगतान की मांग की थी। लंबे विवाद और चर्चाओं के बाद मालिकों ने बोनस देने की परंपरा शुरू की। धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे देश में फैल गई और कंपनियों, सरकारी दफ्तरों से लेकर बैंकों तक में इसे अपनाया जाने लगा।

आर्थिक सुधारों के साथ आया बदलाव

आज के समय में दिवाली बोनस सिर्फ नकद राशि तक सीमित नहीं है। कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को गिफ्ट वाउचर, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, या सालाना प्रोत्साहन बोनस के रूप में भी इनाम देती हैं। वहीं, सरकारी विभागों में भी त्योहार से पहले बोनस का ऐलान कर्मचारियों की खुशियों को दोगुना कर देता है।

कर्मचारियों के लिए मनोबल बढ़ाने का जरिया

दिवाली बोनस केवल एक आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि कर्मचारियों के मेहनत की पहचान भी है। कंपनियों के लिए यह एक तरीका है अपने वर्कफोर्स को मोटिवेट करने का और उनके साथ जुड़ाव बढ़ाने का।

दिवाली बोनस की यह परंपरा दशकों पुरानी जरूर है, लेकिन आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। यह न सिर्फ कर्मचारियों के चेहरे पर मुस्कान लाती है, बल्कि संस्थान और कर्मचारी के बीच भरोसे का रिश्ता भी मजबूत करती है।

Leave a Comment