Dhanteras 2025: सोना खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान, वरना हो सकता है नुकसान
धनतेरस का दिन हिंदू परंपरा में सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सोना खरीदने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। हर साल धनतेरस पर बाजारों में सुनहरी चमक और रौनक देखते ही बनती है।
भारत बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, साल 2020 में धनतेरस पर करीब 40 टन सोना बिका था, जबकि 2022 में 39 टन सोना खरीदा गया। वहीं वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भारत की सालाना सोने की मांग 802.8 टन तक पहुंच गई, जिसकी कीमत करीब 5.15 लाख करोड़ रुपए थी।
ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि चाहे सोने की कीमतें बढ़ें या घटें, भारतीयों का भरोसा सोने पर हमेशा बना रहता है। लेकिन अगर खरीदारी के वक्त सावधानी नहीं बरती गई, तो यह शुभ निवेश नुकसान में भी बदल सकता है।
सोना खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें
सोना सिर्फ गहनों की शोभा नहीं, बल्कि एक अहम निवेश (Investment) भी है। इसलिए खरीदने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें –
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केवल BIS हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें।
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मेकिंग चार्ज और शुद्धता की जांच करें।
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विश्वसनीय ज्वेलर्स या ब्रांड से ही खरीदारी करें।
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बिल और खरीद रसीद जरूर लें।
हॉलमार्क क्या है और क्यों जरूरी है
हॉलमार्क सोने की शुद्धता का सरकारी प्रमाणपत्र होता है, जो BIS (Bureau of Indian Standards) द्वारा जारी किया जाता है। इससे खरीदार को भरोसा मिलता है कि सोना असली और निर्धारित मानक के अनुसार है।
हॉलमार्क वाले गहनों पर चार निशान होते हैं –
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BIS का लोगो
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सोने की कैरेट या शुद्धता (जैसे 22K, 18K, 14K)
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हॉलमार्किंग सेंटर का निशान
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ज्वेलर का यूनिक HUID नंबर
इन निशानों से आप आसानी से असली और नकली सोने की पहचान कर सकते हैं।
डिजिटल गोल्ड क्या है
डिजिटल गोल्ड एक आधुनिक तरीका है जिससे आप ऑनलाइन सोना खरीद सकते हैं। जब आप डिजिटल गोल्ड खरीदते हैं, तो उतने ही वजन का असली सोना आपके नाम पर वॉल्ट में सुरक्षित रखा जाता है। आप इसे कभी भी बेच सकते हैं या फिजिकल गोल्ड (कॉइन या बार) के रूप में डिलीवरी ले सकते हैं।
क्या डिजिटल गोल्ड खरीदना सुरक्षित है?
डिजिटल गोल्ड को आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कुछ बातें ध्यान रखना जरूरी हैं –
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केवल भरोसेमंद प्लेटफॉर्म (जैसे Paytm, PhonePe, Google Pay या बैंकिंग ऐप्स) से ही खरीदें।
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डिजिटल गोल्ड RBI या SEBI द्वारा सीधे रेग्युलेटेड नहीं है, इसलिए निवेश से पहले कंपनी की विश्वसनीयता जांचें।
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इसे शॉर्ट या मीडियम टर्म निवेश की तरह देखें, न कि लॉन्ग टर्म ऑप्शन के रूप में।
निवेश के लिए कॉइन या ज्वेलरी – कौन बेहतर?
अगर आपका उद्देश्य निवेश है, तो सोने के कॉइन या बार खरीदना ज्यादा फायदेमंद है, क्योंकि इनमें मेकिंग चार्ज बहुत कम होता है।
वहीं, ज्वेलरी में डिजाइन और मेकिंग चार्ज अधिक लगते हैं, जो रीसेल के समय वापस नहीं मिलते।
इसलिए निवेश के लिए कॉइन या बार बेहतर विकल्प हैं, जबकि ज्वेलरी भावनात्मक और पारंपरिक उपयोग के लिए खरीदी जाती है।
टैक्स नियम: फिजिकल और डिजिटल गोल्ड दोनों पर लागू
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फिजिकल गोल्ड पर 3% GST देना पड़ता है।
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3 साल से पहले बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स, और 3 साल बाद बेचने पर 20% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है।
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डिजिटल गोल्ड पर भी यही नियम लागू होते हैं।
इसलिए निवेश से पहले टैक्स इंपैक्ट को जरूर समझें।
सोना खरीदने का सही समय
सोना लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट है, इसलिए इसे धीरे-धीरे खरीदना बेहतर है। आप हर महीने या तिमाही SIP की तरह छोटी रकम से सोना खरीद सकते हैं।
त्योहारी या शादी के मौसम से पहले खरीदारी करना लाभदायक होता है, क्योंकि उस समय कीमतें आम तौर पर बढ़ जाती हैं।
क्या बच्चों या ज्वाइंट नाम से सोना खरीदा जा सकता है?
हां, सोना बच्चों के नाम पर या संयुक्त (Joint) नाम से खरीदा जा सकता है।
डिजिटल गोल्ड में भी यह सुविधा उपलब्ध है, हालांकि अकाउंट एक व्यक्ति के नाम पर ही खुलता है, जिससे निवेश पारदर्शी और सुरक्षित रहता है।
धनतेरस के अवसर पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है, लेकिन समझदारी यह है कि शुद्धता, विश्वसनीयता और सुरक्षा पर समझौता न किया जाए। चाहे आप फिजिकल गोल्ड लें या डिजिटल, सही प्लेटफॉर्म और जानकारी के साथ किया गया निवेश ही आपको वास्तविक समृद्धि और लाभ दिला सकता है।





