भारत में सस्ती हुई थाली: अक्टूबर में वेज थाली 17% और नॉन-वेज 12% सस्ती, घर के बजट को राहत
आज के महंगाई वाले दौर में अगर कोई खुशखबरी मिलती है, तो वह होती है रसोई खर्च में राहत की। अक्टूबर में भारत की घरेलू थाली की कीमतों ने आम लोगों को राहत दी है। महंगाई को लेकर पिछले महीनों में लगातार चिंता बनी हुई थी, ऐसे में थाली की कीमतों में आई गिरावट घरेलू बजट को कुछ सुकून देती नजर आ रही है।
अक्टूबर में वेज थाली 17% सस्ती, कीमत घटी 27.8 रुपए पर
देश में एक घरेलू वेजिटेरियन थाली की कीमत अक्टूबर 2025 में सालाना आधार पर 17% घटकर 27.8 रुपए रह गई है। पिछले साल अक्टूबर 2024 में यही थाली 33.3 रुपए की पड़ती थी। यह जानकारी कैपिटल मार्केट कंपनी क्रिसिल के फूड प्लेट कॉस्ट इंडिकेटर से मिली है।
सितंबर 2025 की तुलना में भी अक्टूबर में वेज थाली की कीमत 1% घटी है। सितंबर में यह कीमत 28.1 रुपए थी।
नॉन-वेज थाली भी हुई सस्ती, 12% की गिरावट
वहीं नॉन-वेज थाली की कीमत अक्टूबर में सालाना आधार पर 12% घटकर 54.4 रुपए हो गई है। पिछले साल अक्टूबर में इसकी कीमत 61.6 रुपए थी।
मंथली आधार पर भी 3% की गिरावट दर्ज की गई है। सितंबर में नॉन-वेज थाली की कीमत 56 रुपए थी।
आलू, प्याज, टमाटर और दालें सस्ती होने से राहत
थाली की लागत में गिरावट का प्रमुख कारण है सब्जियों और दालों के दामों में कमी। क्रिसिल रिपोर्ट के अनुसार:
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टमाटर 40% सस्ते
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प्याज 51% सस्ते
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आलू 31% सस्ते
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दालें 17% सस्ती
वेज थाली में आलू और टमाटर की हिस्सेदारी करीब 24% रहती है, इसलिए इनके दाम घटने का सीधा असर थाली पर दिखा।
चिकन के दाम गिरे, नॉन-वेज थाली पर असर
नॉन-वेज थाली की लागत में 50% हिस्सेदारी ब्रॉयलर यानी चिकन की होती है। इस साल चिकन की कीमतों में 6% की कमी दर्ज की गई है, जिससे नॉन-वेज थाली सस्ती हुई है।
LPG और खाने के तेल महंगे, वरना कीमत और कम होती
हालांकि सब्जियों और चिकन के दाम में गिरावट आई है, लेकिन उसी दौरान वेजिटेबल ऑयल 11% और LPG 6% महंगी हुई है। अगर इनकी कीमतें नहीं बढ़तीं, तो थाली और सस्ती हो सकती थी।
कैसे तय होती है थाली की कीमत?
क्रिसिल चारों जोन यानी नॉर्थ, साउथ, ईस्ट और वेस्ट भारत में फूड कॉस्ट का विश्लेषण कर थाली की एवरेज लागत बताता है। इसमें शामिल होती हैं:
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अनाज
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दालें
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सब्जियां
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ब्रॉयलर (चिकन)
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मसाले
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खाना पकाने का तेल
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गैस
वेज थाली में रोटी, सब्जियां, दाल, चावल, दही और सलाद शामिल होते हैं, जबकि नॉन-वेज थाली में दाल की जगह चिकन शामिल होता है।
ध्यान रहे, ये कीमतें घर पर तैयार की जाने वाली थाली की लागत हैं। बाजार या रेस्टोरेंट में उपलब्ध थाली की कीमत में रसोई स्टाफ, संचालन लागत और प्रॉफिट शामिल होते हैं, इसलिए वे अधिक होती हैं।
अक्टूबर में थाली की कीमतों में आई गिरावट कुछ समय के लिए ही सही, लेकिन आम आदमी की जेब को राहत पहुंचाने वाली खबर है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ट्रेंड जारी रहता है या खाद्य कीमतों में फिर से उछाल आता है।
भारत में थाली हुई सस्ती: अक्टूबर में वेज थाली 17% और नॉन-वेज 12% सस्ती, जानें पूरी रिपोर्ट





