ई-कॉमर्स में बड़ा बदलाव: अब हर प्रोडक्ट पर मिलेगा ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ फिल्टर, 2026 से लागू हो सकता है नया नियम

On: November 12, 2025

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अब ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ फिल्टर अनिवार्य: 2026 से बदल जाएगा ऑनलाइन शॉपिंग का तरीका

ऑनलाइन शॉपिंग अब सिर्फ प्राइस और रेटिंग पर निर्भर नहीं रहेगी। बहुत जल्द आपके पास एक नया विकल्प होगा, जिसके जरिए आप घर बैठे यह तय कर पाएंगे कि आपके कार्ट में जा रहा प्रोडक्ट भारत में बना है या किसी दूसरे देश में। डिजिटल बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने की नई पहल शुरू हो चुकी है, और इसका असर आने वाले सालों में साफ दिखाई देगा।

डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स ने प्रस्ताव दिया है कि अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को पैकेज्ड प्रोडक्ट्स के लिए अलग से ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ फिल्टर देना होगा। इससे उपभोक्ता सर्च करते समय सिर्फ ‘मेड इन इंडिया’ या किसी अन्य देश से आए सामान को चुन सकेंगे। यदि यह प्रस्ताव पास हो गया, तो नया नियम 2026 से लागू हो सकता है।


क्या है नया नियम

मंत्रालय ने लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है। इसके तहत:

  • हर ई-कॉमर्स कंपनी जो इम्पोर्टेड सामान बेचती है, उसे वेबसाइट और ऐप पर ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ फिल्टर देना होगा

  • फिल्टर सर्चेबल और सॉर्टेबल होंगे

  • यूजर्स आसानी से लोकल या इम्पोर्टेड प्रोडक्ट चुन सकेंगे

  • फोकस पैकेज्ड आइटम्स पर होगा, जैसे FMCG, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े आदि

फिलहाल प्रोडक्ट लिस्टिंग्स में ओरिजिन की जानकारी मौजूद तो है, लेकिन काफी छिपी हुई होती है। उपभोक्ता को इसे ढूंढने के लिए हर आइटम का पेज खुलना पड़ता है। नए सिस्टम से समय बचेगा और निर्णय लेने में आसानी होगी।


क्यों जरूरी है यह बदलाव

भारत में ई-कॉमर्स मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और 2025 तक यह तीन लाख करोड़ रुपए को पार कर चुका है। इस बीच उपभोक्ताओं ने लगातार शिकायत की है कि उन्हें ‘मेड इन इंडिया’ प्रोडक्ट्स खोजने में दिक्कत आती है।

सरकार का मानना है कि पारदर्शिता की कमी से विदेशी प्रोडक्ट्स को अनजाने में फायदा मिलता है। इस नए नियम से:

  • लोकल मैन्युफैक्चरर्स को बराबरी का मौका मिलेगा

  • उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिलेगी

  • फर्जी ओरिजिन क्लेम्स की पहचान आसान होगी

  • डिजिटल मार्केट में पारदर्शिता बढ़ेगी


सरकारी बयान: ट्रांसपेरेंसी और कंप्लायंस पर जोर

मंत्रालय के अनुसार, यह फीचर उपभोक्ताओं के समय की बचत करेगा और प्रोडक्ट वेरिफिकेशन आसान बनाएगा। अधिकारी के अनुसार:

“ऑटोमेटेड सिस्टम से मॉनिटरिंग आसान होगी और नियमों के उल्लंघन को तुरंत पकड़ा जा सकेगा।”


‘वोकल फॉर लोकल’ को मिलेगा बढ़ावा

यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को मजबूती देगा। लोकल प्रोडक्ट्स को अधिक विजिबिलिटी मिलेगी, जिससे बिक्री बढ़ने की संभावना है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इससे छोटे और लोकल ब्रांड्स की सेल्स 20-30% तक बढ़ सकती है।

उपभोक्ता के लिए:

  • बेहतर और सूचित खरीदारी अनुभव

  • हेल्थ और इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स में सुरक्षा और विश्वसनीयता

मैन्युफैक्चरर्स के लिए:

  • बड़ा एक्सपोजर

  • अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के साथ बराबरी का मौका

सरकार के लिए:

  • नियम अनुपालन की मॉनिटरिंग आसान

  • डिजिटल बाजार में विश्वास बढ़ेगा


आगे क्या

अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को तकनीकी बदलाव करने होंगे। हालांकि यह कदम राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ा है, इसलिए कंपनियों का सहयोग माना जा रहा है। दीर्घकाल में यह बदलाव भारतीय ई-कॉमर्स को और अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और उपभोक्ता-केंद्रित बनाएगा।


भारत का डिजिटल उपभोक्ता अब सिर्फ अच्छा प्रोडक्ट नहीं, बल्कि भरोसेमंद और पारदर्शी जानकारी भी चाहता है। ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ फिल्टर सिर्फ एक डिजिटल फीचर नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं की आवाज और लोकल इंडस्ट्री की शक्ति को बढ़ाने वाला कदम है। 2026 से ऑनलाइन शॉपिंग का अनुभव पहले से ज्यादा स्मार्ट और जागरूक होने जा रहा है।

ई-कॉमर्स में बड़ा बदलाव: अब हर प्रोडक्ट पर मिलेगा ‘कंट्री ऑफ ओरिजिन’ फिल्टर, 2026 से लागू हो सकता है नया नियम

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