ई-कॉमर्स कंपनियों की चालबाज़ी: कैश ऑन डिलीवरी पर छिपे चार्ज, सरकार ने शुरू की जांच

On: October 5, 2025

कैश ऑन डिलीवरी पर अतिरिक्त शुल्क: सरकार ने शुरू की औपचारिक जांच, मंत्री बोले- ये ‘डार्क पैटर्न’ है

सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा कैश ऑन डिलीवरी (COD) ऑर्डर्स पर अतिरिक्त शुल्क वसूलने की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इसे ‘डार्क पैटर्न’ बताते हुए कहा कि विभाग को इस साल इस तरह की कई शिकायतें मिली हैं, जिसके बाद जांच प्रक्रिया को तेज किया गया है।

मंत्री के अनुसार, COD पर ‘कैश हैंडलिंग फीस’ या अन्य छिपे शुल्क जोड़ना ‘ड्रिप प्राइसिंग’ का उदाहरण है — जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत 13 डार्क पैटर्न्स में से एक माना गया है। जुलाई में Zepto जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर शिकायतें सामने आई थीं, जहां चेकआउट के अंतिम चरण में अतिरिक्त शुल्क जोड़ा गया।

प्रह्लाद जोशी ने स्पष्ट किया,

“प्लेटफॉर्म्स की गहन जांच की जाएगी और जो ग्राहक अधिकारों का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। हमारा लक्ष्य है कि ई-कॉमर्स सिस्टम में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं का भरोसा बना रहे।”

ई-कॉमर्स में डार्क पैटर्न्स का बढ़ता चलन, नियमों का उल्लंघन कर रहे कई प्लेटफॉर्म्स

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले डार्क पैटर्न्स का चलन तेजी से बढ़ रहा है। सरकार ने इन पैटर्न्स को उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना है और इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। जांच के दायरे में आने वाले प्रमुख डार्क पैटर्न्स में ये शामिल हैं:

  • ड्रिप प्राइसिंग: उत्पाद की कीमत शुरू में कम दिखाना, लेकिन भुगतान के अंतिम चरण में छिपे शुल्क जोड़ना।

  • फॉल्स अर्जेंसी: “केवल 1 आइटम बचा है” या “अभी खरीदें वरना चूक जाएंगे” जैसे भ्रामक संदेशों के जरिए निर्णय को प्रभावित करना।

  • सब्सक्रिप्शन ट्रैप्स: ऐसी मेंबरशिप या सेवाएं जो ग्राहक की मर्जी के बिना स्वतः रिन्यू होती हैं और जिन्हें रद्द करना मुश्किल बनाया जाता है।

इन तरीकों में कैश ऑन डिलीवरी (COD) पर अतिरिक्त शुल्क जोड़ना भी शामिल है, जिसे हाल ही में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने “ड्रिप प्राइसिंग” का एक उदाहरण बताया है।

कड़ी कार्रवाई का प्रावधान

यदि जांच में कोई प्लेटफॉर्म दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत जुर्माना, वित्तीय दंड, और अन्य विधिक कार्रवाई की जा सकती है। मंत्रालय का उद्देश्य है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पारदर्शी तरीके से काम करें और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा हो।

ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े ज़रूरी सवालों के जवाब: जानिए ग्राहक के अधिकार

सवाल 1: अगर ऑनलाइन ऑर्डर किया गया प्रोडक्ट डिफेक्टिव या गलत निकले तो क्या करें?

ऐसी स्थिति में सबसे पहला कदम है — सबूत इकट्ठा करना।

  • डिलीवरी के तुरंत बाद फोटो और वीडियो बनाएं, जिससे खराबी या गलती स्पष्ट हो।

  • फिर संबंधित ई-कॉमर्स ऐप या वेबसाइट पर जाकर ‘रिटर्न’ या ‘रिप्लेसमेंट’ रिक्वेस्ट दर्ज करें।

  • अधिकतर कंपनियां 7 से 10 दिन की रिटर्न पॉलिसी ऑफर करती हैं।

सवाल 2: क्या ग्राहक बिना कारण बताए भी सामान वापस कर सकता है?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि वेबसाइट की रिटर्न पॉलिसी क्या कहती है।

  • कुछ प्लेटफॉर्म्स पर ‘नो क्वेश्चन रिटर्न’ की सुविधा होती है, जिसमें ग्राहक बिना कारण बताए तय समय (आमतौर पर 7 या 10 दिन) में प्रोडक्ट लौटा सकता है।

  • हालांकि कुछ आइटम्स जैसे अंडरगारमेंट्स, पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स और कस्टमाइज्ड ऑर्डर्स इस पॉलिसी से बाहर हो सकते हैं।
    इसलिए खरीदारी से पहले रिटर्न और रिफंड पॉलिसी को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।

सवाल 3: अगर कंपनी रिफंड देने में देरी करे या टालमटोल करे तो क्या करें?

सबसे पहले अपने सभी ट्रांजैक्शन और बातचीत का रिकॉर्ड रखें, जैसे:

  • ऑर्डर की रसीद

  • कस्टमर केयर से कॉल या चैट के स्क्रीनशॉट

  • ईमेल प्रूफ

सवाल 4: ऑनलाइन शॉपिंग करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

ऑनलाइन शॉपिंग करते समय निम्न बातों का ध्यान रखना जरूरी है ताकि धोखाधड़ी और असुविधा से बचा जा सके:

  1. विश्वसनीय वेबसाइट चुनें:

    • केवल जानी-मानी और सुरक्षित वेबसाइट्स से खरीदारी करें।

    • वेबसाइट का URL HTTPS से शुरू हो, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

    • ग्राहक रिव्यू, रेटिंग्स और प्रोडक्ट की विश्वसनीयता जरूर जांचें।

  2. प्रोडक्ट डिस्क्रिप्शन ध्यान से पढ़ें:

    • प्रोडक्ट का साइज, मटेरियल, वारंटी, और इस्तेमाल की जानकारी अच्छे से समझें।

    • रिटर्न और रिप्लेसमेंट पॉलिसी भी जरूर देखें।

  3. कीमतों की तुलना करें:

    • अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर उसी प्रोडक्ट की कीमतें मिलाएं।

    • डिस्काउंट या ऑफर की सच्चाई जांचें—हर ऑफर असली नहीं होता।

  4. सुरक्षित भुगतान करें:

    • केवल ट्रस्टेड पेमेंट मेथड्स जैसे क्रेडिट कार्ड, UPI या डिजिटल वॉलेट का ही उपयोग करें।

    • किसी भी संदिग्ध लिंक या अज्ञात पेमेंट गेटवे से लेन-देन न करें।

  5. रिटर्न और रिफंड नीति समझें:

    • खरीदारी से पहले जान लें कि किस स्थिति में प्रोडक्ट लौटाया जा सकता है और रिफंड कैसे मिलेगा।

    • डिलीवरी टाइम और कस्टमर केयर सपोर्ट की जानकारी भी देखें।

सवाल 5: क्या ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह उपभोक्ता के अधिकार समान हैं?

हां, उपभोक्ता को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की खरीदारी में समान कानूनी अधिकार प्राप्त हैं।

  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को भी उसी श्रेणी में रखा गया है जैसे पारंपरिक दुकानों को।

  • इससे ग्राहक को निम्न अधिकार मिलते हैं:

    • उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा की गारंटी

    • सही और पारदर्शी जानकारी

    • समय पर डिलीवरी और उचित रिटर्न/रिफंड

    • अनुचित व्यापारिक व्यवहार से संरक्षण

 

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