ATM रणनीति में बड़ा बदलाव: बैंकों का रुख अब गांवों की ओर
महानगरों में खर्च बढ़ा, उपयोग घटा; 1 लाख लोगों पर सिर्फ 15 ATM, 80% शहरी क्षेत्रों में
डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन और शहरी इलाकों में ATM संचालन की बढ़ती लागत के चलते बैंक अब अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। महानगरों में ATM की उपयोगिता घट रही है, वहीं रखरखाव का खर्च आसमान छू रहा है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि अब शहरों में ATM घाटे का सौदा बन गए हैं।
मुंबई जैसे शहर में एक छोटे ATM स्पेस का किराया ₹40,000 तक पहुंच जाता है, जबकि मासिक रखरखाव लागत ₹1 लाख तक हो सकती है। ऊपर से मुफ्त निकासी सीमा और इंटरचेंज फीस पर नियंत्रण ने ATM से होने वाली आय और भी घटा दी है।
बैंकों का कहना है कि ऐसे में अब ग्रामीण और छोटे शहरों की ओर रुख करना ज्यादा बेहतर है, भले ही वहां ATM लगाना शुरू में महंगा पड़े। आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल देश में प्रति 1 लाख लोगों पर औसतन सिर्फ 15 ATM हैं — जिनमें से 80% शहरों में हैं, जबकि 67% जनसंख्या ग्रामीण भारत में रहती है।
ATM की संख्या में गिरावट, शाखाओं में बढ़ोतरी
RBI के आंकड़ों के अनुसार, देश में ATM की कुल संख्या 2022-23 में जहां 2.16 लाख थी, वहीं 2024-25 में घटकर 2.11 लाख रह गई है। इसके उलट, बैंक शाखाओं की संख्या लगातार बढ़कर 1.42 लाख हो गई है।
नगद निकासी में भी गिरावट
ATM से नगद निकासी में भी लगातार गिरावट देखने को मिली है:
| वर्ष | नगद निकासी | बैंक ATM | बैंक शाखाएं |
|---|---|---|---|
| 2021 | ₹28.89 लाख करोड़ | 2.11 लाख | 1.30 लाख |
| 2022 | ₹31.05 लाख करोड़ | 2.15 लाख | 1.29 लाख |
| 2023 | ₹33.04 लाख करोड़ | 2.16 लाख | 1.33 लाख |
| 2024 | ₹32.59 लाख करोड़ | 2.15 लाख | 1.38 लाख |
| 2025 | ₹30.63 लाख करोड़ | 2.11 लाख | 1.42 लाख |
ATM की संख्या में गिरावट और नगद लेनदेन में कमी से यह स्पष्ट है कि बैंकिंग क्षेत्र तेजी से डिजिटल हो रहा है। फिर भी, देश की बड़ी आबादी को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण इलाकों में ATM विस्तार पर जोर देना बैंकों की नई प्राथमिकता बनता जा रहा है।
सोर्स: RBI





